साउथ में लहलहाएंगी नार्थ इंडिया की फसलें
तमिलनाडु : यूं तो उत्तर भारत और दक्षिण भारत की मौसम और संस्कृति में जमीन आसमान का फर्क है लेकिन कृषि वैज्ञानिकों की मेहनत से लगातार
फसलों को साझा करने की कवायद जारी रहती है। तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय के उद्यान शोध केंद्र यकार्ड में भी वैज्ञानिक ऐसी ही मुहिम में जुटे हैं।
वैज्ञानिकों की आल इंडिया कस्टर रिसर्च प्रोजेक्ट पर वैज्ञानिकों की सामूहिक बैठक में यहां पर चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के शोध पर मुहर लगाई गई। डाक्टर एस के श्रीवास्तव कास्टर एग्रोनामिस्ट ने मिट्टी के इस्तेमाल को लेकर नए शोध बताए जिससे कस्टर की प्रजाति को देशव्यापी उपज का स्थान मिल सके। मीडिया प्रभारी डाक्टर नौशाद खान ने बताया कि वैज्ञानिकों के अनुसार अरंड की बुवाई 15 जून से 15 जुलाई के बीच करने से अधिक उत्पादन हो सकता है। अंडी की फसल से अधिक उत्पादन के लिए 80 किग्रा नाइट्रोजन, 30 किग्रा फास्फोरस,30 किग्रा पोटाश प्रति हेक्टेयर के हिसाब से उपयुक्त पाया गया। वैज्ञानिकों ने यह भी फैसला लिया कि पौधों के बीच 90 सेमी दूरी रखने से उपज बेहतर हो सकती है।

