यूपीटीयू को ले डूबा एमटीयू- जीबीटीयू का ‘टाइटेनिक’

लखनऊ देश भर में तेजी से उभर रहे ब्रांड यूपीटीयू को डूबोने का काम एमटीयू और जीबीटीयू के टाइटेनिक ने ही किया है। यह खुलासा खुद गौतमबुद्ध प्राविधि‍क विश्‍वविद्यालय के शीर्ष अफसरों ने किया है। गौरतलब है कि पिछली सरकार ने पश्चिमी और पूर्वी और मध्‍य उत्‍तर प्रदेश टाके इंजीनियरिंग कालेजों का बंटवारा करके गौतम बुद्ध प्राविधि‍क विश्‍वविद्यालय और महामाया प्राविधिक विश्‍वविद्यालय को जन्म दिया लेकिन इसके बाद इंजीनियरिंग कालेजों में छात्रों का टोटा पड़ गया। अब खुद कुलपति प्रोफेसर कृपा शंकर और प्रति कुलपति वीके सिंह मान रहे है कि कालेजों का बंटवारा दो यूनिवर्सिटी में करना गलत फैसला रहा। कुलसचिव यू एस तोमर ने भी पत्रकारों से अनौप‍चारिक वार्ता में माना कि प्रदेश सरकार स्‍तर पर तेजी से दो विश्‍वविद्यालयों के विलय का प्रस्‍ताव चल रहा है।

जीबीटीयू के पदाधिकारी मानते हैं कि इंजीनियरिंग कालेजों की हालत, छात्रों के गिरते स्‍तर और ब्रांड यूपीटीयू के गिरते ग्राफ का कारण है। एमटीयू के यूनिवर्सिटी का बंटवारा है। नए विवि के अस्तित्‍व में आने के बाद ही यूपीटीयू के शीर्ष कालेजों ने डीम्‍ड यूनिवर्सिटी का दर्जा ले लिया जबकि गिनती के कालेजों को छोड़ दें तो बीटेक और एमबीए की खाली सीटें घटते क्रेज को बयान कर रहे हैं। अब कुलपति एसईई के प्रश्‍नपत्रों के स्‍तर से लेकर छात्रों के मानसिक स्‍तर को बढ़ाने की बात कह रहे हैं। उधर पूरे मामले में मुख्‍यमंत्री सचिवालय ने भी फाइल तलब की है। दूसरी ओर बीटेक प्रवेश परीक्षा देने वाले छात्रों का कहना है कि एमटीयू को तो कोई जानता ही नहीं है। यूपीटीयू में दाखिला लेना था, वह भी अब नहीं है। ऐसे में दूसरे राज्‍यों में इंजीनियरिंग का क्रेज फिर बढ़ने लगा है। अन्‍य राज्‍यों में फीस भी फैक्‍टर है। ऐसे में यूपीटीयू ब्रांड न मिलने से भी छात्रों को अपनी मार्केट वैल्‍यू कम होने की आशंका है। पूर मामले में अब मर्जर का रास्‍ता तलाशा जा रहा है। जिससे खोई साख वापस लाई जा सके।

 

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