बुंदेलखंड विवि ने निकाला, सीएसजेएम विवि की नियुक्ति पर सवाल
झांसी, कानपुर। छत्रपति शाहूजी महाराज विवि में सीनियर प्रोफेसरों की नियुक्ति राजभवन का शिकंजा कस
गया है। विवि स्तर पर भी जांच शुरू होने से आने वाले दिनों में संकट गहरा सकताहै। है। दस्तावेजों की जांच में सीनियर प्रोफेसर मुकेश रंगा को अभिलेख न प्रस्तुत कर पाने का आरोपी बनाया गया है। 2009 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी लेने की जांच के बाद रंगा को बुंदेलखंड विवि झांसी से हटा दिया गया था। शिकायत में एक पूर्व प्रोफेसर पर अवैध तरीके से करोड़ों की ग्रांट देने का आरोप लगाया गया है।
विवि के सीनियर प्रोफेसर मुकेश रंगा, नीरज कुमार सिंह और एएल जाटव के खिलाफ राजभवन ने कुलपति को जांच के निर्देश दिए हैं। तीनों की नियुक्ति को अनियमित करार देते हुए राजभवन शिकायत की गई थी। अब धीरे- धीरे जांच में परतें खुल रही हैं। युवा दस्तक के पास ऐसे दस्तावेज हैं जिनमें साफ है कि गड़गड़ी हुई और उसको रोकने के लिए ही बुंदेलखंड की कार्य परिषद ने रंगा के खिलाफ सख्त कदम उठाया। यह सिर्फ एक मामला नहीं है। आईबीएम के उपाचार्य नीरज कुमार सिंह पर पीएचडी के बिना ही लेक्चरर बनने का आरोप है जबकि जीवन विज्ञान विभाग के प्रोफेसर अशर्फी लाल के चयन का मामला भी कोर्ट में विचाराधीन है। अब शिक्षक आपस में लामबंद होकर एक दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। राजभवन को इन शिक्षकों की शिकायत करने वाले भी शिक्षक ही हैं। जिसके बाद विवि का संकट और बढ़ गया है।

